What is The Secret of Success – A Buddha Motivational Story

What is The Secret of Success – A Buddha Motivational Story

हम जब भी किसी सफल इंसान को देखते हैं तो उसी की तरह खुद को भी सफल बनाना चाहते हैं। लेकिन कई बार बहुत कोशिशें करने के बाद भी हम fail ही होते जाते हैं और सफलता पाने का कोई भी रास्ता हमे समझ नहीं आते। सफल होने के लिए सबसे पहले हमे ये जानना जरूरी है की what is the secret of success. 

हर किसी की सफलता का secret अलग होता है और किसी की the story of success भी अलग होती है, लेकिन फिर भी आज में आपको buddha motivational story on success के जरिये ये बताने की कोशिश करूँगा की सफल होने का सीक्रेट क्या होता है।

दोस्तों सफल होने का secret किसी का idea चुराना या किसी को देख कर उसकी तरह चीज़ें करना तो कभी नहीं होता क्यूंकि हम सबकी किस्मत एक जैसी नहीं होती इसलिए दूसरों को copy करके ये कभी ना सोचें की आपको the secret of success मिल गया है। तो चलिए आज की इस short motivation story on success के जरिये समझते हैं safal hone ka secret. 

किसी ने क्या खूब लिखा है, “मंज़िल मिल ही जायेगी एक दिन, भटकते-भटकते ही सही.. गुमराह तो वो हैं, जो घर से निकलते ही नहीं।”

–Motivational Shayari
Motivational Shayari Image

The Secret of Success – motivational story in hindi for success

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Buddha Motivational Story

एक बार गौतम बुद्ध अपने एक शिष्य के साथ किसी गाँव में प्रवचन देने जा रहे थे। दोनों थक चुके थे और अँधेरा होने से पहले दूसरे गाँव पहुंच जाना चाहते थे ताकि उन्हें सारी रात जंगल में ना बितानी पड़े। थोड़ा आगे जाकर गौतम बुद्ध ने खेत में काम कर रहे एक बूढ़े से पूछा, ‘दूसरा गांव अभी कितना दूर है ?’

उस व्यक्ति ने जवाब दिया, ‘ज्यादा दूर नहीं। चिंता मत कीजिए, मुश्किल से दो मील और फिर आप पहुंच जाएंगे। 

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दो मील का सफर तय हो चुका था लेकिन कोई गाँव नहीं आया। वे दोनों और ज्यादा थक गए थे। थोड़ा चलने के बाद उन्हें एक बूढ़ी औरत मिली जिससे बुद्ध ने पूछा, ‘पास वाला गाँव यहां से कितनी दूर है ?’ 

वो औरत बोली, ‘ज्यादा दूर नहीं बस दो मील और आप लगभग पहुंचने ही वाले हैं।’ 

गौतम बुद्ध मुस्कुराये और बूढ़ी औरत भी। 

उनका शिष्य सोच रहा था की, ‘इसमें मुस्कुराने की क्या बात है ?”

वो दोनों दो मील फिर चले लेकिन अब भी कोई गाँव नहीं आया। बुद्धा ने फिर एक व्यक्ति से वही प्रश्न पुछा और हर बार की तरह वही जवाब मिला जो बांकी सब दे रहे थे। और फिर वही मुस्कुराना। 

ये सब देखकर उस शिष्य को गुस्सा आ गया और वो बोला, ‘मैं अब और आगे नहीं चलने वाला। मैं थक गया हूं। ऐसा लग रहा है कि हम वो दो मील का सफर कभी तय नहीं कर पाएंगे। जिससे भी रास्ता पूछो वो दो मील बोलकर मुस्कुरा देता है, आप मुझे बस इतना बताएं कि आप मुस्कुरा क्यों रहे थे? दो मील रास्ता बताने के बाद आप भी मुस्कुरा रहे थे और वो भी। इसकी क्या वजह है ? क्या वो लोग हमसे झूठ बोल रहे थे।”

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गौतम बुद्ध ने कहा, ‘हमारा मन एक ही है। बस थोड़ा दूर और फिर मंज़िल आपके सामने होगी, ऐसा सुनकर मैं मुस्कुराया, वो भी मुस्कुरा दिए। मैने भी पूरी जिंदगी यही काम किया है और लोग अंत में पहुंच ही जाते हैं। पर, शुरू में ही अगर हम उन्हने ये बता दें की मंज़िल अभी बहुत दूर है और वहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं है, तो वो लोग पहले ही हार मान लेंगे और फिर धीरे धीरे आगे बढ़ने का हौंसला भी खो देंगे लेकिन बस थोड़ा दूर और, कहते हुए दो सौ मील का सफर भी कब पार हो जाएगा ये हमे पता ही नहीं चलेगा।”

lesson we learn from this buddha motivation story for success in hindi:

‘बस थोड़ा दूर और’, यही है सफलता का मूल मंत्र। जो लोग ये बात समझ जाते हैं वो धीरे धीरे ही सही लेकिन अपनी मज़िल की तरफ बढ़ते रहते हैं और एक दिन ऐसा आता है उनकी मंज़िल उनके क़दमों में होती है। सफलता अक्सर हमे बहुत दूर लगती है क्यों की सफलता मिलना एक सपने की तरह होता है जिसकी उम्मीद बहुत दूर होती है। 

हमे बस इतना करना है की खुद को positive रख कर उस सपने की तरफ बढ़ते जाना है। बेशक शुरुवात में आपको कोई result ना मिले तो उससे परेशान ना होना बस खुद से इतना कहें की ‘बस थोड़ा दूर और।‘ किसी भी नए काम या नयी चीज़ को शुरू करते ही हम उसमे सफल नहीं हो जाते। कुछ लोग इस मामले में किस्मत वाले होते हैं जिनके हर काम सही होते है लेकिन हर कोई ऐसा नहीं होता।

आप जब भी किसी नए काम की शुरुवात करें तो अपने आप को failures के लिए हमेशा तैयार रखें और जब भी failures आएं तो उनकी वजह से खुद को कभी भी रोके नहीं। अपनी मेहनत और लगन से अपने आप को आगे बढ़ाते जाएँ क्यों की एक ही जगह पर रुकें रहने से कहीं ज्यादा बेहतर होता है लगातार धीरे धीरे चलते रहना।

रुके हुवे लोग कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाते लेकिन जो लगातार कोशिश करते रहते हैं वो अपनी मंजिल पर एक दिन जरूर पहुँच जाते हैं। इसलिये जब भी किसी काम को लेकर आपका हौंसला काम होने लगे तो बस खुद से इतना कहें की ‘बस थोड़ा दूर और‘ और फिर मंजिल आपके सामने होगी। 

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