महाभारत से सीखने वाली बातें – Motivational Learnings From Mahabharat in Hindi

महाभारत, हमारे धर्म का एक ऐसा महाकाव्य है जिसका वर्णन स्वयं भगवान श्री कृष्ण द्वारा किया गया था। महाभारत की पूरी कहानी धर्म और अधर्म के बीच थी। महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कई ऐसी बातें बताई जिन्हें अपनाने से आज भी हमारी जिंदगी बदल सकती है।

आज की पोस्ट भगवान श्री कृष्ण के ज्ञान पर नही बल्कि महाभारत के उन किरदारों पर है जिन्होंने उस लड़ाई के दौरान कुछ अच्छा या फिर कुछ गलत किया। महाभारत से सीखने को बहुत सा ज्ञान है जो शायद ही हम एक बार में सीख पाए। लेकिन इस Motivational Learnings from Mahabharat के जरिए में आपको उन किरदारों के बारे में बताऊंगा जिनसे हम कुछ सीखना चाहिए और साथ ही उनके बारे में भी जिनसे हमें कुछ नहीं भी सीखना चाहिए.

महाभारत धर्म के प्रति निष्ठा बनाने पर जोर देता है, जो की नैतिकता, कर्तव्य, और सही आचरण का मार्गदर्शन करता है। महाभारत में कई ऐसे किरदार थे जो धर्म और कर्तव्य के मार्ग से भटक गए और अधर्म के रास्ते पर चल पड़े।

महाभारत से सीखने वाली बातें, Motivational Learnings From Mahabharat in Hindi,

महाभारत शक्ति के दुरुपयोग पर भी जोर देता है। दुर्योधन राज पाठ और सत्ता के मिल जाने से खुद को बहुत शक्तिशाली समझने लगा था और उसके कारण अहंकारी और अत्याचारी बन गया। उसने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और अंत में मारा गया। ये सिखाता है कि शक्ति के साथ सावधान रहना चाहिए, इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

महाभारत से ना सीखने वाली बातें (Learnings From Mahabharat in Hindi)

महाभारत में ऐसे कई किरदार थे जिनकी गलतियों की वजह से धर्मयुद्ध छिड़ा या उसकी शुरुवात हुई. अगर वो अपनी समझ से काम लेते तो शायद चीजें कुछ और होती. उन किरदारों की जिंदगी की बातें या गलतियां ऐसी हैं जो हमे कभी नहीं सीखनी चाहिए और ना ही करनी चाहिए.

1- युधिष्ठिर की तरह बातों के बहकावे में आकर जुआं मत खेलो।

महाभारत की शुरुवात में मामा शकुनि की बातों में आकर युधिष्ठिर, दुर्योधन के साथ जुवां खेलने को तैयार हो जाता है, जबकि वो खुद भी इस बात को जानता था की सकुनी चालबाज है, वो दुर्योधन को हारने नही देगा। बातों के बहकावे में आकर युधिष्ठिर जुआं खेलता है जिसमें उसकी हार होती है। राज पाठ के साथ साथ वो द्रौपदी को भी हार जाता है।

ये सीखाता है की हमें कभी भी किसी की बातों में आकर कोई फैंसला नही लेना चाहिए। अक्सर लोग बातें बनाकर कुछ गलत करने के लिए बहकाते हैं और जो ऐसे बहकावे में आता है, वो कुछ ना कुछ गलत काम करके अपनी जिंदगी को बर्बाद कर लेता है। अपने फैसले हमेशा सोच समझ कर लेने चाहिए। कोई भले कितना ही सुनाए या फिर मीठी मीठी बातें बनाकर लालच दे, हमें खुद की समझ से ही काम करना चाहिए।

2- कर्ण की तरह एहसान मत लो।

दुर्योधन ने कर्ण को अंग देश का राज पाठ सौंप कर अंगराज बनाया था। जिसकी वजह से कर्ण भी राजाओं की गिनती में आ सका। यही वो एहसान था जिसके चलते कर्ण को महाभारत के युद्ध में दुष्ट दुर्योधन का साथ देकर धर्म के खिलाफ जाना पड़ा।

कई बार हम भी गलत लोगों से एहसान ले लेते हैं और फिर सारी जिन्दगी उस एहसान के बोझ तले दब जाते हैं। ऐसे लोगों से कभी मदद ना लें जो बदले में आपका फाइदा उठा सकते हैं। बुरे लोगों से मदद लेना मतलब मुसीबत में हाथ डालना है।

3- धृतराष्ट्र की तरह संतान मोह में पत पड़ो।

धृतराष्ट्र ने संतान मोह में आकर दुर्योधन और अपने सभी पुत्रों को कभी बुरे कर्म करने से नही रोका। जिसकी वजह से दुर्योधन अधर्म के रास्ते पर चल पड़ा। जो माता पिता संतान मोह में आकर बच्चों की गलतियों को नजरंदाज कर देते हैं उन्हें भविष्य में मुसीबतों का सामना ही करना पढ़ता है।

बच्चों की हर जिद्द मान लेना, ‘छोटा है’ बोलकर गलतियों पर ना टोकना, ये सब परेशानियां का सबब ही बनता है। बच्चों को टोकना, पीटना और ढांठना भी जरूरी है ताकि वो हमेशा कुछ गलत करने से डरें। बच्चों को इतना प्यार ना दें की उनके अंदर मां बाप का डर ही खतम हो जाए और वो हर चीज अपनी मर्जी से करने लगें।

4- द्रौपदी की तरह किसी का मजाक मत उड़ाओ।

युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के दौरान, दुर्योधन जब पानी से भरे एक जलकुंड में गिर जाता है तो उसे देखकर सब हंसने लगते हैं इस समय द्रौपदी यह कहकर हंसती है कि ‘अंधे का पुत्र अंधा ही होता है’, इस मजाक की वजह से दुर्योधन गुस्से से भर जाता है और उसके अंदर बदले की आग जलने लगती है. जिस वजह से वह द्रोपदी का अपमान करता है और पांडवों के खिलाफ साजिश रचने लगता है। उस छोटे से मजाक को भी कई लोग महाभारत के होने का बहुत बड़ा कारण मानते हैं।

हमें कभी भी किसी की शारीरिक कमियों को लेकर मजाक नहीं उड़ाना चाहिए या किसी भी तरह का ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए जो सामने वाले व्यक्ति को अपमानित करे। कई बार ऐसे मजाक बहुत भारी पड़ जाते हैं, जो लोग मजाक सह नहीं पाते वो अपने मन में कुछ और ही बातें बना लेते हैं, उनके अंदर बदले की भावना आ जाती है।

जरूरत से ज्यादा कभी किसी का मजाक ना उड़ाएं खास करतब जब वह लोग अपने किसी परिचित या बहुत लोगों के साथ हो। मजाक को मजाक तक ही सीमित रखें। उसे इस तरह ना करें कि सामने वाले को वह अपना अपमान लगे।

5- दुर्योधन की तरह जिद्द मत रखो।

दुर्योधन जानता था की युद्ध में श्री कृष्ण पांडवों का साथ देंगे और अपनी कूटनीतियों के चलते वो पांडवों को हारने नही देंगे। इस सब के बाद भी दुर्योधन ने सिर्फ अपनी जिद के कारण युद्ध करने का फैंसला लिया। अपनी सेना और भाइयों की एक के बाद एक मृत्यु देखने के बाद भी उसने अपनी जिद्द नही छोड़ी और अंत में कौरवों का नाश हो गया।

किसी भी चीज के लिए जिद्दी बनना एक गलत आदत है। कई बार ये आदत हम पर इतनी हावी को जाती है की हम अपनी जिद्द को पूरी करने के लिए कुछ भी करने हो तैयार हो जाते हैं और भूल जाते हैं की क्या करना सही है और क्या गलत। इसलिए किसी भी चीज के लिए ज़िद्दी ना बनें। जो चीज जरूरी है उसके पीछे भागें।

6- दुशासन की तरह स्त्री का अपमान मत करो।

दुशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करने का प्रयास किया। अपनी रक्षा के लिए द्रौपदी ने श्री कृष्ण को याद किया और उन्होंने द्रौपदी की रक्षा करी।

इस संसार में किसी भी स्त्री का अपमान करना सबसे नीच काम है। आए दिन आप अपने आस पास ऐसे लोगों को देखते होंगे जो शराब का सेवन करके अपनी पत्नी, मां, बहन और बेटियों को गालियां देते हैं, मारते हैं। लड़कियों को छेड़ना, गालियां देना, उनके साथ बुरा करना, ऐसे नीच कामों से हमें हमेशा बचना चाहिए। हर स्त्री का सम्मान करना और उनकी रक्षा करना यही हमारा धर्म और कर्म होना चाहिए।

महाभारत से सीखने वाली बातें (Motivational Learnings from Mahabharat)

महाभारत से सीखने वाली बातें, Motivational Learnings From Mahabharat in Hindi,

1- श्री कृष्ण तरह धर्म और सत्य का साथ दो।

महाभारत में पांडव ही ऐसे तो जो धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते थे। उन्हें ना सत्ता का लालच था और ना ही धन का मोह। आज हम लोग ना तो धर्म के मार्ग पर चलते हैं, ना ही सत्य बोलते हैं। हर इंसान झूठ का सहारा लेकर अपने काम निकलवाना चाहता है। धर्म का लोगों को कुछ ज्ञान नही है।

धर्मों के बारे में हम लोगों को बस उतना ही ज्ञान है जितना हमने दूसरों से सुना है। पूजा पाठ करना, मंदिर जाना ये सब लोग धर्म के प्रति कम और दिखाने के लिए ज्यादा कर रहे हैं। मंदिरों को टूरिस्ट प्लेस बना दिया गया है और धर्म के नाम पर सिर्फ राजनीति हो रही है। कलयुगी दुनिया में झूठ, पाप और अधर्म के मार्ग पर चलने वाले लोग हर दिन बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन धर्म, संस्कृति का नमो निशान ही मिट जाएगा और दुनिया अधर्मियों से भर जाएगी। ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए हम सभी को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना होगा। धर्म और सत्य का मार्ग भले कठिन है लेकिन पापों से बचने का एक यही सबसे अच्छा जरिया है।

2- अभिमन्यु की तरह साहसी बनो।

चक्रव्यूह तोड़ने का पूरा ज्ञान ना होने के बावजूद अभिमन्यु अपने परिवार की रक्षा के लिए चक्रव्यूह में कूद पड़ा और अपनी अंतिम सांस तक लड़ता रहा। अभिमन्यु का ऐसा करना इस बात का प्रमाण है की साहसी इंसान को किसी भी परिस्थिति में अपने परिवार के लिए हमेशा खड़ा रहना चाहिए। परिस्थितियां भले कैसी ही हों हमें हमेसा साहसी बनना चाहिए। साहस ही हमारी वीरता का प्रमाण होता है।

3- अर्जुन की तरह अपना जीवन भगवान के हाथों में सौंप दो।

अर्जुन कभी भी महाभारत की लड़ाई करना नहीं चाहता था। वो नही चाहता था वो अपने ही परिवार के लोगों के विरुद्ध लड़े और जब वो इस स्थिति से खुद को निकाल नही पाया तो उसने सबकुछ श्री कृष्ण के हाथों सौंप दिया।

हम सभी की जिंदगी में भी कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब हमें ये समझ नही आता की जाना कहां है, क्या करना है, क्या बनना है। ये स्थिति ऐसी होती है जिसमें हमारा मन हमारा साथ नही देता और हम खुद को हारा हुवा मानने लगते हैं।

जब परिस्थियां आपके हाथ में ना हों और आप चाहकर भी कुछ नही कर सकते तो ऐसे में आपको सबकुछ ऊपरवाले पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि जब आप कुछ नही कर सकते तब ऊपरवाला ही होता है जो कुछ कर सकता है। हमें भगवान पर और उसकी करनी पर हमेशा विश्वास करना चाहिए।

दोस्तों, वैसे तो महाभारत से सीखने को बहुत कुछ है लेकिन एक ही आर्टिकल में सबकुछ cover कर पाना बहुत मुश्किल है। महाभारत से सीखने वाली और भी बातें हम शेयर करते रहेंगे

आशा करता हुं की इस Learnings From Mahabharat in Hindi से आपको अच्छी शिक्षा मिली हो। ऐसी ही पोस्ट पढ़ने के लिए इस ब्लॉग से जुड़े रहें। मोटिवेशनल कहानियां सुनने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।

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