नेल्सन मंडेला की प्रेरणादायक जीवन कहानी | Nelson Mandela Biography New

अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो शायद ही हमें ऐसा कोई देश मिलेगा जो हमेशा से खुशहाल रहा है। हर देश में कुछ ना कुछ समस्याएं हमेशा बनी रहती हैं। जब भी कोई समस्या जन्म लेती है तो उसके साथ उस समस्या से लड़ने वाले व्यक्ति भी पैदा होते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति थे नेल्सन मंडेला।

Nelson Mandela ने अपने जीवन में रंगभेद को जड़ से खत्म करने के लिए बहुत सी लड़ाईयां लड़ी। जिसकी वजह से उन्हें कई सालों तक जेल में रहना पड़ा। रंगभेद की समस्या पश्चिमी देशों में हमेशा से ही रही है।

आज भी रंगभेद के कारण कई घटनाएं होते रहती हैं। रंगभेद का सबसे ज्यादा प्रभाव शुरुवात में दक्षिण अफ्रीका में ही था। नेल्सन मंडेला ने इस रंगभेद के खिलाफ एक जंग छेड़ दी। मंडेला ने गांधी जी की राह पर चलते हुवे अहिंसा को अपनाया। उन्होंने बिना किसी लड़ाई के अपने देश को इस समस्या से बाहर निकाला।

जिसके लिए उन्हें 27 सालों तक जेल में भी रहना पड़ा। हालांकि इस सब के बाद भी 1994 में वो दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। 1994 से लेकर 1999 तक उन्होंने President के रूप में अपनी सेवा दी। नेल्सन मंडेला की जीवन कहानी के जरिए हम आपको उनके संघर्ष के बारे में बताएंगे।


Nelson Mandela Biography के जरिए आप जानेंगे की कैसे एक अकेला इंसान बदलाव की शुरुवात कर सकता है। नेल्सन मंडेला की प्रेरणादायक कहानी आपको बहुत प्रभावित करेगी।

Nelson Mandela का शुरुवाती जीवन (Nelson Mandela Biography) –

नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को मवेजो के गांव उमटाता में हुवा था, जो की South Africa के Cape Province का एक हिस्सा है। बचपन में मंडेला बहुत शैतानियां करते थे और लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर देते थे, और उसकी वजह से लोगों ने उन्हें रोलिहलहला (Rolihlahla) उपनाम दे दिया। जिसका मतलब होता है Troublemaker. इस तरह मंडेला का नाम Rolihlahla Mandela हो गया। आने वाले सालों में वो अपने पारिवारिक नाम Madiba से भी जाने गए।

मंडेला के पिता का नाम Gadla Henry Mphakanyiswa Mandela था। उनके पिता म्वेजो कस्बे के सम्राट के लोकल चीफ और काउंसलर थे। उन्हें इस पद में 1915 को नियुक्त किया गया क्योंकि उनसे पहले के अधिकारी पर एक व्हाइट मजिस्ट्रेट द्वारा corruption का आरोप लगाया गया था। 1926 में Gadla पर भी करप्शन का आरोप लगाकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया और इस बात को नेल्सन मंडेला से छुपाकर रखा गया।

नेल्सन अपने पिता की तीसरी पत्नी से जन्मे बच्चे थे। उनके पिता की चार पत्नियां, चार लड़के और नौ लड़कियां थी, जो की एक दूसरे गांव में रहते थे। मंडेला की मां का नाम Nosekeni Fanny था। मंडेला के माता पिता दोनो की अनपढ़ थे लेकिन उनकी मां एक Christian थी, और ईसाई धर्म के नाते उन्होंने मंडेला को सात वर्ष की उम्र में लोकल के ही एक मैथोडिस्ट स्कूल में भेज दिया।


“एक इंटरव्यू में मंडेला ने बताया था की उनके परिवार में कोई भी व्यक्ति कभी स्कूल नहीं गया और ना ही शिक्षा ली। जिस दिन पहली बार वो स्कूल गए तो उनकी स्कूल टीचर द्वारा सभी बच्चों को एक इंग्लिश नाम दिया गया, और उन्हें जो नाम मिला वो था ‘Nelson’.”

नेल्सन मंडेला एजुकेशन (Neslon Mandela Education) –

Nelson जब 12 साल के थे तब उनके पिता का देहांत हो गया। पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां ने उन्हें Thembu regent के चीफ जोगिनताबा दलिंदयेबो (Jongintaba Dalindyebo) की गार्जियनशिप में छोड़ दिया। अपने गार्जियन के साथ मंडेला हर रविवार चर्च में सेवा देने जाते थे और Christianity उनके जीवन का एहम हिस्सा बन गई। मंडेला ने अपनी स्कूली शिक्षा मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से पूरी करी। जहां उन्होंने इंग्लिश, Xhosa, हिस्ट्री और ज्योग्राफी पढ़ी।

1949 में मंडेला ने 150 अश्वेत छात्रों के लिए बनाई गई खास संस्था के जरिये फोर्ट हेयर विश्वविद्यालय में BA की डिग्री लेने की पढ़ाई शुरू करी। अपने दूसरे वर्ष में उन्होंने students’ representative council के साथ मिलकर विश्विद्यालय में मिलने वाले खाने की Quality को लेकर चल रहे बहिष्कार में शामिल हो गए। जिसकी वजह से उन्हें यूनिवर्सिटी से suspend कर दिया गया और मंडेला अपनी डिग्री पूरी करने के कभी वापिस नही आए।

नेल्सन मंडेला का संघर्ष (Nelson Mandela Struggle)

मंडेला ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कई तरह की नौकरियां करी। उन्होंने कुछ समय के लिए सोने की खदान में चौकीदारी का काम किया, लेकिन वहां से निकाल दिया गया इसके बाद उन्होंने एक Law Firm में Clerk का काम करना शुरू कर दिया। यहीं से उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की सभाओं में शामिल होना शुरू किया। इन सभाओं से वो काफी प्रभावित हुवे क्योंकि वहां यूरोपीय, अफ्रीकी, भारतीय और रंगीन लोग सब एक साथ शामिल रहते थे।

नौकरी के साथ साथ मंडेला ने University of South Africa से अपनी डिग्री की पढ़ाई भी जारी रखी। 1943 में उन्होंने अपनी स्नातक को पढ़ाई पूरी कर ली। इसके बाद मंडेला Johannesburg चले गए और वहां उन्होंने एक वकील के रूप में राजनैतिक मार्ग चुनने की सपथ ली। 1943 में ही उन्होंने University of the Witwatersrand से law की पढ़ाई शुरू करी।

जहां वो अकेले अश्वेत अफ्रीकन विद्यार्थी थे और उसकी वजह से उन्हें रंगभेद का बहुत सामना करना पड़ा। Law की पढ़ाई के साथ मंडेला राजनैतिक गतिविधियों में भागीदारी करने लगे और उसी साल उन्होंने बस के बढ़ते किराए को लेकर चल रहे बॉयकॉट में भी हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने ANC (African National Congress) को ज्वाइन कर लिया। मंडेला ने ANC Youth League (ANCYL) की स्थापना में भी काफी योगदान दिया और बाद में उन्हें इसका संस्थापक बनाया गया।

नेल्सन मंडेला का राजनैतिक जीवन सफर, संघर्ष और सफलता

1952 में ANC ने कुछ भारतीय समूहों के साथ मिलकर रंगभेद के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। ये आंदोलन महात्मा गांधी से प्रभावित अहिंसक मार्ग को अपनाने के लिए डिजाइन किया गया था। 22 जून को डरबन में चल रही 10000 लोगों की रैली को मंडेला ने संबोधित किया और वहीं से इस आंदोलन को शुरुआत हुई। इस आंदोलन के चलते मंडेला को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस आंदोलन की वजह से मंडेला दक्षिण अफ्रीका में एक अश्वेत राजनैतिक हस्ती बन गए। मंडेला की गिरफ्तारी के बाद भी आंदोलन चलता रहा और देखते देखते आंदोलनकारियों की संख्या 10,000 से 100,000 हो गई। दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी के आदेश दिए। जब सरकार स्थिति को संभाल नहीं पाई तो उन्होंने मंडेला से उत्तराधिकारी बनने की सिफारिश करी।

हालांकि श्वेतों ने उनकी उम्मीदवारी का विरोध किया लेकिन अक्टूबर में उन्हें क्षेत्रीय राष्ट्रपति चुन लिया गया। 1952 में Suppression of Communism Act की वजह से मंडेला को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके लिए उन्हें 9 महीने की कड़ी सजा मिली लेकिन सरकार द्वारा उनकी सजा को रोक दिया गया.

उनको सभाओं में भाग लेने और एक समय में एक से ज्यादा व्यक्तियों से बात करने के लिए 6 महीने तक प्रतिबंध कर दिया। कुछ समय बाद मंडेला की एक स्पीच “No Easy Walk to Freedom” की वजह से ANC पर भी बैन लग गया। 1953 में मंडेला ने एक Law Firm की शुरुवात करी। उनकी firm अश्वेत लोगों के बीच काफी प्रचलित हो गई।

वो अक्सर अश्वेत लोगों के साथ पुलिस के द्वारा की जाने वाली क्रूरता के लिए लड़ा करते थे। वहां के अधिकारियों को ये सब पसंद नही आया और उन्होंने उनके परमिट को हटाकर उनकी फर्म को शहर से बाहर शिफ्ट कर दिया। इस सब के बाद भी मंडेला रंगभेद के खिलाफ और अश्वेतों के हक़ के लिए लगातार प्रदर्शन करते रहे लेकिन साल 1962 में लोगों और मजदूरों को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसाने के जुर्म में उन्हें आजीवन कारावास की सजा हो गई।

उन्हें 27 साल तक रोबिन द्वीप की कारागार में रखा गया। वहां भी मंडेला अश्वेत कैदियों के लिए आवाज उठाते रहे। साल 1990 में नेता एफ डबल्यू क्लार्क की सरकार आई और उन्होंने मंडेला की पार्टी और उनके संघर्षों को देखते हुवे, अश्वेतों पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए। 1 फरवरी 1990 को मंडेला सार्वजनिक रूप से सबके सामने आए। 1994 के इलेक्शन ने अश्वेतों को चुनाव लडने का अधिकार दिया गया। इस चुनाव में बहुमत के साथ नेल्सन मंडेला की जीत हुई और वो पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।

Nelson Mandela वैवाहिक जीवन –

अपने जीवन में नेल्सन मंडेला ने तीन शादियां करी। और उनकी हर पत्नी ने कठिनायों में हमेशा उनका साथ दिया। नेल्सन मेडल की तीन शादियों से उनकी 6 संताने थी। मंडेला ने पहली शादी 1944 में अपने मित्र और सहयोगी वॉल्टर सिसुलू की बहन इवलिन मेस से की। दूसरी शादी उन्होंने 1962 में नोमजामो विनी मेडीकिजाला से करी। उस वक्त वक्त मंडेला पर देशद्रोह का मुकदमा भी चल रहा था हालांकि बाद में वो निर्दोष साबित हो गए थे। मंडेला ने तीसरी शादी अपने 80वें जन्मदिन पर ग्रेस मेकल से करी।

नेल्सन मंडेला की मृत्यु (Nelson Mandela Death in Hindi) –

मार्च 2013 में lung Infection होने के कारण मंडेला को Pretoria के अस्पताल में भर्ती करा गया। लेकिन उनकी स्तिथि में कोई सुधार नहीं आया और lung Infection जून 2013 तक बहुत ज्यादा बड़ गया। सितंबर 2013 को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया और 5 दिसम्बर 2013 को 95 साल की उमर में उनकी मृत्यु हो गई।

नेल्सन मंडेला की संपत्ति –

मृत्यु के समय मंडेला की कुल नेटवर्थ 4.1 मिलियन डॉलर थी।

नेल्सन मंडेला सम्मान और प्रसिद्धि –

अपने कार्यों को और अपनी संघर्षों की वजह से मंडेला दक्षिण अफ्रीका में एक बहुत ही प्रसिद्ध व्यक्ति रहे हैं। South Africa में उन्हें “Father of the nation” और “Founding father of democracy” भी माना जाता है। दक्षिण अफ्रीका के बाहर उन्हें “Global Icon” माना जाता है। अपने राजनैतिक करियर के दौरान मंडेला को 250 से ज्यादा Awards, Prizes, honorary degree और साथ ही citizenships भी प्रदान की गई।

नेल्सन मंडेला पुरुस्कार (Nelson Mandela Awards List)-
  • Nobel Peace Prize,
  • US Presidential Medal of Freedom,
  • Soviet Union’s Lenin Peace Prize,
  • Libyan Al-Gaddafi International Prize for Human Rights.
  • Bharat Ratna (1990)
  • Nishan-e-Pakistan (1992)
  • Atatürk Peace Award by Turkey (1992, accepted in 1999)
  • Fulbright Prize for International Understanding
  • 18 July, as “Mandela Day”.

Nelson Mandela Biography पड़कर आप जान ही गए होंगे ही क्यों वो आज भी हम सभी के लिए motivation हैं। उन्हें अपना पूरा जीवन दूसरों को उन्हें हक दिलाने और रंगभेद को जड़ से हटाने में बीता दिया। उन्होंने अकेले वो कर दिखाया जो शायद नामुमकिन था। संघर्षों और मुसीबतों के बाद भी वो रुक नही है और रंगभेद जैसी बीमारी को दक्षिण अफ्रीका से निकाल फेंका।


आई होप आपको Nelson Mandela Biography in hindi पढ़कर उनके बारे बेहतर जानकारी मिली हो। ऐसी ही और भी जीवन कहानियां पढ़ने के लिए इस ब्लॉग से जुड़े रहें। नेल्सन मंडेला की लाइफ स्टोरी को शेयर जरूर करें।

नेल्सन मंडेला से जुड़ी अन्य जानकारी
Q – नेल्सन मंडेला इतने क्यों प्रसिद्ध है?

Ans- दक्षिण अफ्रीका से रंगभेद जैसी समस्या को दूर करने और अपना सारा जीवन दूसरों की जिंदगी को बेहतर करने की वजह से मंडेला इतने प्रसिद्ध हैं।

Q- मंडेला कितने साल जेल में रहे?

Ans- 12 जुलाई 1964 को मंडेला को उम्रकैद की सजा सुनाई गई जिसकी वजह से उन्हें 27 साल जेल में गुजारने पड़े।

Q- नेल्सन मंडेला की मृत्यु कब हुई थी?

Ans- 5 December 2013, in Johannesburg.

Q- नेल्सन मंडेला को भारत रत्न कब मिला?

Ans- 1990

Q- नेल्सन मंडेला की पुस्तक का नाम?

Ans- Long Walk To Freedom: The Autobiography of Nelson Mandela

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