एलोन मस्क की सफलता की सच्ची कहानी- Elon Musk Success Story

एलोन मस्क जो कि फिलहाल दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, वो आए दिन किसी ना किसी चर्चा का विषय बने रहते हैं। चाहे बात ट्विटर को खरीदने की हो या फिर उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी। आए दिन उनके बारे में कुछ ना कुछ सुनने को मिल ही जाता है। इसलिए आज हम भी आपको एलोन मस्क की सफलता की कहानी (Elon Musk success story in hindi) सुनाने जा रहे हैं।

Elon Musk story of success के जरिए आप ये बात जान पाएंगे कि आंखिर एलोन मस्क सबसे अमीर और सबसे सफल व्यक्ति कैसे बने। एलोन मस्क की कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही प्रेरणादायक भी है। elon musk story in hindi या फिर elon musk biography के जरिए आप उनके बारे में और भी ज्यादा चीजें जान पाएंगे।

एलोन मस्क की सफलता की सच्ची कहानी- Elon Musk Success Story in Hindi

Elon Musk एक ऐसे इंसान है जिनकी सोच और क्रिएटिव दिमाग ने उन्हें दुनिया के प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल कर दिया। Elon Musk को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था। जहाँ 10 से 11 साल की उम्र में बच्चे बहुत कम समय पढ़ाई को देते है और ज्यादा से ज्यादा समय खेलने में बिताते हैं वहीं Elon Musk अपना ज्यादातर समय किताबें पढ़ने में बिताते थे। बचपन से ही 10 साल की उम्र तक उन्होंने इतनी किताबें पढ़ ली थी कि एक ग्रेजुएट लेवल का इंसान भी इतनी किताबें नहीं पढ़ पाया होगा।

12 साल की उम्र में उन्होंने प्रोग्रामिंग की किताबें पढ़ते पढ़ते अपने घर के कंप्यूटर में ही एक गेम बना डाली। और उस गेम को उन्होंने 500 डॉलर में एक ऑनलाइन कंपनी को बेच दिया। और इसके आगे चलकर कई सारी असफलताओं के बावजूद कड़ी मेहनत के साथ उन्होंने SPACE X नाम की स्पेस एजेंसी बना डाली।

जो काम NASA करने में असफल रही वो काम Elon Musk ने इंटरनेट और किताबों की मदद से कर दिया। उन्होंने बहुत कम लागत में रॉकेट बना के रॉकेट की दुनिया में मानो क्रांति ला दी हो। इस बात से आप अंदाज़ा लगा सकते हो कि उनकी सोच बचपन से ही कितनी रचनात्मक थी। और कहीं न कहीं उनकी इन्ही सोच ने उन्हें इतना प्रभावशाली बना दिया। 

Elon Musk का जीवन परिचय (elon musk story to success) :

Elon Musk का जन्म साउथ अफ्रीका के प्रेटोरिया शहर में 28 जून 1971 को हुआ। Musk के पिता इंजीनियर होने के साथ-साथ पायलेट भी थे और उनकी माता डाइटीशियन भी थी। उन्हें पढ़ने का इतना शौक था कि जहां किसी किताब को पढ़ने में लगभग 10 से 11 दिन लगते हैं वहीं इस किताब को वह 3 दिन में ख़त्म कर देते थे। किताबें में उनकी इतनी रूचि थी कि अपनी स्कूल की छोटी सी लाइब्रेरी उन्होंने 1 साल में ही खत्म कर दी और नई किताबों की प्रतीक्षा करते थे। 

उनकी किताबों को पढ़ने की दिलचस्पी और शौक ने उन्हें इन्हें इतना अद्भुत इंसान बना दिया कि उन्होंने फिर पीछे मुड़ के नहीं देखा।  किताब पढ़ते पढ़ते उनकी रूचि कंप्यूटर सीखने और चलाने की हुई। और 10 साल की उम्र में उन्होंने कम्प्यूटर चलाना सीखा। जिसके चलते उन्हें मात्र 12 साल की उम्र में एक छोटी सी प्रोग्रामिंग सीख कर एक ब्लास्टर नाम का गेम बना डाला। और इस गेम को उन्होंने पीसीएस टेक्नोलॉजी नाम की एक ऑनलाइन कंपनी को 500 डॉलर में बेच दिया। और आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये प्रोग्रामिंग उन्होंने बिना किसी कोचिंग और बिना किसी इंस्टिट्यूट में ट्रेनिंग के बना दी। 

शैक्षिक योग्यता (elon musk education):

17 साल की उम्र में Elon Musk ने क्वीन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई शुरू की। और वहां 2 साल पढ़ने के बाद वो पेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय शिफ्ट हो गए। उसके बाद 1995 में Elon Musk Ph.D. करने के लिए कैलिफ़ोर्निया शिफ्ट हो गए लेकिन वहां भी 2 दिन की रिसर्च के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। क्योंकि उन्हें पता था कि वो इस तरह की जॉब के लिए नहीं बने है। 

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करियर (elon musk career):

एक समय था जब यलो बुक्स हुआ करती थी जिसमे अलग अलग विषय की जानकारियां होती थी लेकिन उसकी कुछ कीमत थी जिसे हर कोई नहीं पढ़ सकता था और उस समय इंटरनेट उतना यूज़ नहीं होता था। लेकिन इंटरनेट के प्रयोग से Elon Musk समझ गए थे कि इंटरनेट में इतनी ताकत है कि ये आगे चल कर क्रांति ला सकता है। और इसी से उनको एक आईडिया आया उन्होंने इंटरनेट के प्रयोग से यलो बुक्स की सारी जानकारी इंटरनेट पर डाल दी जिसे लोग आसानी से पढ़ सके।

इसके कुछ समय बाद Elon Musk ने X.COM नाम की मनी ट्रांसफर सर्विस कंपनी बनायीं। और उसके एक साल बाद ही यह कंपनी कोनफिनिटी नाम की कंपनी से जुड़ गयी और बाद में इसी कंपनी का नाम बदलकर PAYPAL रख दिया। और आज के समय में PAYPAL इंटरनेशनल पेमेंट के लेन-देन के लिए सबसे विश्वसनीय माध्यम है। उसके कुछ सालों बाद 2002 में eBay नाम की ऑनलाइन कंपनी ने इसे 15 बिलियन डॉलर देकर खरीद लिया।

धरती पर बढ़ती पॉपुलेशन को देखते हुए वो बहुत निराश हो गए थे। और उन्होंने ये ठान लिया कि मैं मंगल पर लोगों को भेजूंगा और ग्रीन हाउस इफ़ेक्ट के जरिये मंगल ग्रह पर खेती करने के लिए एक छोटा सा एक्सपेरिमेंट करना चाहते थे। और इस विषय पर काम करना उन्होंने 2001 से शुरू कर दिया। लोगों को मंगल पर भेजने के लिए उन्हें लाइट रीफफर्स्ट इंडियन कॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल की जरूरत थी.

जिसे खरीदने के लिए वह मास्को पहुंच गए, लेकिन वहां रॉकेट और मिसाइल के दाम सुनकर उनके होश उड़ गए क्योंकि वहां उनको इन दोनों की कीमत 8 मिलियन डॉलर बताया इसीलिए वो वहां से लौट आये क्योंकि यह रकम उनके बजट से बहुत ज्यादा था। लेकिन वहां से निराश होकर उन्होंने हार नहीं मानी और ऐसी कई कंपनियों के पास गए जहाँ रॉकेट के अलग अलग पार्ट्स बनाये जाते हैं और फिर उनको मिला के असेम्ब्ल किया जाता था। जब उन्होंने इनकी कैलकुलेशन किया तो पाया कि ये कीमत उनके बजट में थी।

और बस फिर क्या था उन्होंने खुद ही किताबों और इंटरनेट से रॉकेट साइंस को समझ के एक टीम तैयार की जिसका नाम SpaceX रखा। और इस कम्पनी का उद्देश्य 2030 तक लोगों को मंगल ग्रह तक ले जाना है। और इसके साथ साथ उन्होंने 2003 में 2 लोगों के साथ मिलकर टेस्ला(tesla) नाम की कंपनी की शुरुआत भी की। टेस्ला कंपनी में इन्वेस्ट करने का उनका मुख्य उद्देश्य भी कम कीमत में इलेक्ट्रिक कार बनाना था जिससे वो पेट्रोल और डीज़ल से लोगो को राहत दिला सकें। 

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रॉकेट का परीक्षण :

सब कुछ तैयार हो जाने के बाद अब बारी थी रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने की। 2006 में उन्होंने जब अपना पहला रॉकेट अंतरिक्ष में भेजा तो वह रास्ते में ही ब्लास्ट हो गया। फिर उन्होंने दोबारा कोशिश की और इस बार रॉकेट अंतरिक्ष तक तो गया लेकिन ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने तीसरी कोशिश की और तीसरी बार भी यही हुआ रॉकेट स्पेस में जाते ही ऑफ रुट हो गया। 

लगातार रॉकेट लॉन्च के असफल होने तथा रॉकेट को बनाने व लॉन्च करने में इतना पैसा खर्च हो रहा था कि वो दिवालियां होने के कगार पर थे। और उधर सारा पैसा रॉकेट लांच में लगा देने से टेस्ला कंपनी की फंडिंग भी रुक गयी थी। और वो अपने नए इलेक्ट्रिक व्हीकल पर काम नहीं कर पा रहे थे और वहां भी उनका काम ठंडा पड़ गया वो कंपनी भी बंद होने के कगार पर थी। 

इस तरह की असफलताएं किसी को भी धराशाही कर सकती है और किसी के भी हौसले को तोड़ सकती है। लेकिन Elon Musk हार मानने वालों में से कहाँ थे। इस बार उन्होंने अंतिम प्रयास किया सारे बचे हुए पैसो को इकट्ठा कर उन्होंने अपना सब कुछ लास्ट रॉकेट लांच पर लगा दिया। उन्होंने मन में ठान ली थी या तो उनके बेहतर भविष्य का निर्माण होगा और नए युग का आरम्भ होगा या फिर उनकी जिंदगी बर्बाद होगी और मेहनत करके अपना पेट पालेंगे। 

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अब वो समय आ गया था जब उन्होंने अपना आखिरी रॉकेट लांच किया सबकी निगाहें रॉकेट पर थी और देखते ही देखते रॉकेट स्पेस में पहुंच गया और उनका मिशन सफल हुआ। मिशन के सफल होते ही NASA ने उन्हें 1.5 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट दे दिया। और वहीं से उनकी मेहनत और दृंढ संकल्प ने उन्हें दुनिया के 21 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल कर दिया। और उधर फिर से टेस्ला कंपनी भी स्टार्ट हो गयी। 

सीख जो Elon Musk से हम सभी को मिलती है:-

वो कहते हैं न मेहनत करने वालों की हार नहीं होती। जिस स्थिति से Elon Musk गुजरे वो दौर किसी भी आम व्यक्ति की हिम्मत तोड़ने के लिए काफी है। लेकिन संघर्ष के बाद ही तो सफलता का आनंद आता है। और Elon Musk ने ये साबित कर दिया कि अगर कुछ करने का जूनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। Elon Musk कहते हैं कि Problem का होना सबसे बड़ी परेशानी नहीं है उस Problem का Solution ढूढ़ना सबसे बड़ी परेशानी है।

आई होप आपको इस सफलता की सच्ची कहानी से जीवन में कुछ करने की प्रेरणा मिली हो। ऐसी और भी सफल लोगों की प्रेरणादायक कहानियां पड़ने इस पेज से जुड़े रहें। इस स्टोरी को शेयर जरूर करें। 

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