APJ Abdul Kalam Short Motivational Story for Students (in Hindi)

आज की इस पोस्ट में हम Dr. APJ Abdul Kalam की जिंदगी का एक ऐसा किस्सा बताने वाले हैं जो शायद ही आपने कहीं सुना हो। आज जो Abdul Kalam motivational story for students हम आपके साथ शेयर करेंगे वो Dr. Kalam के स्कूल के दिनों से जुड़ी है।

स्कूल से जुड़ी होने के कारण ये स्टोरी या ये किस्सा स्टूडेंट्स के लिए जानना बहुत जरूरी है और खासकर उन स्टूडेंट्स के लिए जिन्हें हम बैकबेंचर्स कहते हैं। Backbenchers यानी की वो बच्चे जो क्लास की अंतिम Seats में बैठते हैं और हर टीचर को लगता है की ऐसे बच्चों का कोई भविष्य नहीं होता।

Student भले Backbencher हो या फिर Frontbencher वो होता एक स्टूडेंट है और हर शिक्षक की ये जिम्मेदारी होनी चाहिए की वो क्लास के सभी स्टूडेंट्स पर बराबर ध्यान दे। अक्सर ये देखने को मिलता है की टीचर्स सिर्फ आगे बैठने वाले बच्चों पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं और सोचते हैं की जो करेगा ये आगे वाले ही करेगा, पीछे वाला बस पीछड़ता ही चला जाएगा।

इन सब बातों पर फिलहाल हम अंत में चर्चा करेंगे लेकिन उससे पहले हम जानते हैं एपीजे अब्दुल कलाम की जिंदगी का प्रेरणादायक किस्सा जो स्टूडेंट्स के लिए और हम सभी के लिए भी जानना जरूरी है।

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APJ Abdul Kalam Short Motivational Story for Students In Hindi

अब्दुल कलाम के घर में कोई भी पढ़ा लिखा नहीं था, लेकिन बावजूद इसके उनका पढ़ाई में बहुत मन लगता था और वह बचपन से ही पढ़ने में आगे थे। कलाम हमेशा अपने मित्र Ramanandha Sastry के साथ स्कूल के आगे वाली बेंच में बैठा करते थे। Ramanandha, एक बड़े हिंदू पुरोहित का बेटा था।

जब कलाम कक्षा 5 में थे तो उनकी क्लास में एक नया टीचर आया और उसने देखा कि एक गोल टोपी पहने हुए मुस्लिम लड़का, एक मुख्य पुरोहित के लड़के के साथ बैठा हुआ है।

ये देखकर उस टीचर को गुस्सा आ गया और उसने कलाम को वहां से उठाकर लास्ट बेंच में बैठा दिया। उस समय कलाम कुछ नही बोले और चुपचाप पीछे जाकर बैठ गए। इस घटना के बाद उन्होंने संकल्प लिया की ‘पीछे बैठकर ही मैं कुछ बड़ा करके दिखाऊंगा।”

आज हम सब जानते ही हैं की Dr. APJ Abdul Kalam ने कितना कुछ करके दिखा दिया। दुनिया उन्हें मिसाइल मैन ऑफ इंडिया के नाम से जानती है। भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में, वह अपनी दूरदर्शिता, विनम्रता और सादगी के लिए जाने जाते थे।

वो हर फील्ड के लोगों से जुड़े और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए और जीवन में बड़ी सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करते रहे। उन्होंने Education, Youth Development और Science and Technology पर सबसे ज्यादा काम किया।

Motivation For Students in Hindi

दोस्तों, वो हमेशा कहते थे की क्लास में आगे या पीछे बैठना मायने नहीं रखता, मायने रखती है आपकी मेहनत, लगन और नॉलेज। बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जो क्लास में पीछे बैठते हैं और टीचर उन पर खास ध्यान नहीं देते जिसकी वजह से उन बच्चों का कॉन्फिडेंस लेवल कम हो जाता है। उन्हें लगता है कि टीचर हम पर ध्यान नहीं देते तो शायद हम जीवन में सफल नहीं हो पाएंगे।

लेकिन ऐसा नहीं है टीचर जो पढ़ाता है वो हर बच्चे को बराबर पढ़ाता है, Importent ये है की आप चीजों को कितना समझते हैं, आप घर में जाकर कितना पढ़ते हैं, रिवाइज कितना करते हैं क्योंकि टीचर एक या दो बार पढ़ाता है बाकी आप पर है कि आप उसे कैसे समझते हैं और उस ज्ञान का कैसे इस्तेमाल करते हैं। सफल होने के लिए जरूरी नहीं है कि आप क्लास में सबसे आगे बैठे और तभी सफल हो पाएं।

ऐसे बहुत से लोगों को आप अपने आसपास देखते होंगे जो क्लास में बहुत अच्छे थे, पढ़ाई में सबसे आगे रहते थे लेकिन आज जीवन में बहुत पीछे हैं। जो बच्चे स्कूल में उनसे एवरेज थे वो आज उनसे भी आगे बढ़ चुके हैं।

किसी भी स्टूडेंट का जीवन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह क्लास में आगे बैठकर पढ़ता है या पीछे बैठकर पढ़ता है बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि वह मेहनत कितनी करता है, उसका Vision कैसा है, उसके सपने कैसे हैं।

दोस्तों कुछ बनने की चाहत अगर इंसान को स्कूल टाइम से ही हो तो उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि टीचर उसे कितना पढ़ा रहा है बल्कि वह खुद अपनी तरफ से मेहनत करता है और अपने सपने को साकार करता है। एपीजे अब्दुल कलाम जो बचपन से ही पढ़ाई में बहुत अच्छे थे।

उन्होंने बहुत मेहनत करी, टीचर के पीछे बैठाने से वह घबराएं नहीं या उनका कॉन्फिडेंस लेवल नहीं टूटा बल्कि उन्होंने ठान लिया कि पीछे बैठकर ही कुछ बड़ा करना है और वो उन्होंने करके भी दिखाया।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है, “The best brains of the nation may be found on the last benches of the classroom.” (देश का सबसे अच्छा दिमाग क्लासरूम की आखिरी बेंचों पर भी मिल सकता है।)

कभी भी क्लास के दूसरे होशियार बच्चों से या आगे बैठने वाले बच्चों से खुद को कंपेयर ना करें और अगर आप खुद आगे बैठते हैं तो कभी भी पीछे बैठने वालों से अपनी तुलना ना करें, ये ना सोचे कि जो पीछे बैठा है वह जीवन में कभी कामयाब नहीं हो सकता।

किसी भी स्टूडेंट के कामयाब होने के लिए पहली सबसे जरूरी चीज ‘मेहनत,’ दूसरी सबसे ज़रूरी चीज़ है ‘पढ़ाई’ और तीसरी सबसे जरूरी चीज ‘एक सपना’ यानी कि उसे क्या बनना है।

अगर आप स्टूडेंट है, स्कूल में है या कॉलेज में है तो अपना एक सपना बनाएं कि मुझे यह बनना है या इस नौकरी में जाना है, इस फील्ड में कामयाब होना है, उस हिसाब से अपनी पढ़ाई की तैयारी करें।

हम अक्सर स्कूल में या कॉलेज में यह सब नहीं सोचते उस वक्त हम पढ़ाई को मजे में ले लेते हैं, मौज मस्ती, दोस्तों के साथ घूमना, लड़की बाजी करना है, इन सब चीजों में अपना टाइम निकाल देते हैं। और कुछ लोग जो समझदार होते हैं, होशियार होते हैं।

वह अपना विजन शुरू से लेकर चलते हैं। वह सब चीज करते हैं, जिंदगी के पूरे मजे लेते हैं, स्कूल लाइफ, कॉलेज लाइफ के पूरे मजे लेते हैं लेकिन अपने विजन को कभी नहीं छोड़ते और स्कूल से निकलने के बाद या कॉलेज से निकलने के बाद सफलता पाते हैं और सफल जिंदगी जीते हैं।

कुछ स्टूडेंट जो उल्टी सीधी चीजों में ज्यादा लगे रहते हैं, जिनका कोई aim नहीं होता वो कॉलेज करने के बाद, अच्छे स्कूल से पढ़ने के बाद भी अच्छी नौकरी नहीं कर पाते और असफल हो जाते हैं,

इसलिए एक विद्यार्थी के लिए बहुत जरूरी होता है सपना, एक सपना, एक गोल, एक aim। उस पर काम करना, पढ़ना और सिर्फ पढ़ना, क्योंकि कोई भी विद्यार्थी सफल हो सकता है तो सिर्फ अपने ज्ञान की वजह से ना की किसी के एहसान की वजह से।

आई होप यह बातें आपके काम आईं हो अगर आप एक विद्यार्थी हैं तो आशा करता हूं कि motivational story for students बातों से आपको जीवन में कुछ करने की, कुछ बनने की प्रेरणा मिली हो। इस स्पीच या इस टॉपिक पर जो भी मैंने लिखा है, अगर आप विद्यार्थी हैं और आप चाहते हैं कि इसमें कुछ सुधार हो या students के लिए मोटिवेशनल वाली कोई और बातें या पोस्ट चाहिए तो कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। प्रेरणादायक आर्टिकल पढ़ने के लिए इस पेज से जुड़े रहें।

(Note- इस कहानी को किसी धार्मिक विचारधारा से ना जोड़ें। यह सिर्फ विद्यार्थियों की प्रेरणा के लिए है।)

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