बीरबल की सीख – Best Short Moral Story in Hindi

short moral story in hindi- अकबर बीरबल के किस्से भला किसने नहीं सुने। बीरबल, अकबर के दरबार में सबसे चतुर और बुद्धिमान व्यक्ति थे और अकबर हमेशा बीरबल की चतुराई और बुद्धि की परीक्षा लेते रहते थे। अकबर और बीरबल की नैतिक कहानियां मजेदार होने के साथ साथ हम सभी को नैतिकता का पाठ भी पढ़ाती हैं। बीरबल की कहानियां समझदारी और चतुराई की मिशाल हैं।

आज की इस akbar birabal moral story in hindi के जरिये हम आपके लिए बीरबल की ऐसी ही एक मजेदार और ज्ञान से भरी शार्ट मोरल स्टोरी लेकर आये हैं। इस motivational moral story से आपको लोगो को बेहतर तरीके से समझने की सीख मिलेगी। बीरबल की कहानी को पूरा जरूर पढ़ें और दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

बीरबल की सीख – Akbar Birbal Short Moral Story in Hindi

एक समय की बात है। अकबर के राज्य में एक बहुत ही अच्छा मूर्तिकार था। वो जो भी मूर्ति बनाता उसमे कुछ ना कुछ खास जरूर होता था। एक दिन वो मूर्तिकार बीरबल के ज्ञान की परीक्षा लेने के लिए, अकबर के दरबार में तीन एक जैसी दिखने वाली मूर्तियां लेकर आया।

उन तीनो मूर्तियों में फरक कर पाना बहुत मुश्किल था। अकबर ने वो तीन मूर्तियां देखी और उन मूर्तियों की काफी तारीफ करी और उनमे से एक मूर्ति को आपने पास रखने का और उस मूर्तिकार को उचित इनाम देने का फैसला किया।

लेकिन उस मूर्तिकार ने कहा, “मुझे इन मूर्तियों के बदले इनाम नहीं चाहिए में इनमे से एक मूर्ति आपको गिफ्ट कर दूंगा, अगर आपके दरबार का कोई भी मंत्री मुझे ये बता दे की इन तीनो मूर्तियों में से सबसे ख़ास मूर्ति कौन सी है।”

अकबर ने उसकी बात मान ली। जिन मूर्तियों में कमी निकालना मुश्किल था उनमे से एक ख़ास मूर्ति की पहचान करना अकबर के मंत्रियों के बस से बाहर था। अकबर ने इस पहेली को सुलझाने के लिए बीरबल को बुलाया और सारी बात बताई।

बीरबल ने तीनो मूर्तियों को बहुत बारीकी से देखा और फिर उन्होंने एक मूर्ति के कान में जोर से फूँक मारी तो हवा दूसरे कान से बाहर निकल गयी। फिर बीरबल ने दूसरी मूर्ति के कान में फूँक मारी तो हवा उस मूर्ति के मुँह से बाहर निकल गयी। इसी तरह बीरबल ने तीसरी मूर्ति के कान में फूँक मरी लेकिन इस बार हवा कहीं से भी नहीं निकली। और फिर बीरबल ने कहा की ये तीसरी मूर्ति ही सबसे ख़ास है।

वो मूर्तिकार हैरान हो गया। उसने पूछा, “ये बात तुम कैसे कह सकते हो?”

बीरबल बोले, “ये तीनो मूर्तियां तीन व्यक्तियों की तरह हैं। पहली मूर्ति जिसमे फूँक मारने पर हवा दूसरे कान से बाहर निकल गयी वो मूर्ति उस व्यक्ति की तरह है जिसे हम कोई सीक्रेट बात बताते हैं तो वो थोड़ा ही समय बाद उस बात को भूल जाता है।
दूसरी मूर्ति जिसमे फूँक मारने पर हवा उसके मुँह से निकल गयी वो मूर्ति उस व्यक्ति की तरह है जो हमारी किसी भी बात को जानकार या फिर सुनकर उसे अगले ही पल किसी और को भी बता देते हैं। ऐसे लोग किसी भी बात को छुपाकर नहीं रख सकते।

लेकिन तीसरी मूर्ति जिसमे से हवा कहीं से भी बाहर नहीं आयी। इस तरह के व्यक्ति ही अच्छे और ख़ास होते हैं जो हर रहष्य (Secret) को छुपा कर रखते हैं और उस बात हमेशा याद भी रखते हैं। आप इस तरह के लोगों पर भरोसा करके अपनी बात बता सकते हैं।” मूर्तिकार बीरबल की चतुराई से खुश हो गया और उसने वो मूर्ति अकबर को गिफ्ट कर दी।

नैतिक सीख (Moral Lesson) जो हमे बीरबल की कहानी से मिलती है-

ये दुनिया ऐसे लोगों से भरी पड़ी है जिनके मन में कोई भी बात टिक नहीं सकती। आज नहीं तो कल वो हर बात किसी ना किसी के साथ शेयर कर ही देते हैं। इस तरह के लोग अक्सर खुद के लिए और दूसरों के लिए मुसीबत ही खड़ी करते हैं। जो लोग दूसरे की बातों को इधर उधर करते हैं उन पर कोई भी व्यक्ति भरोसा नहीं करता। बेहतर होगा की आप अपनी बातें उन्ही लोगों के साथ शेयर करें जिन लोगों पर आपको भरोसा हो और जो आपकी बातों को सीक्रेट ही रखे।

किसी भी व्यक्ति को अपना कोई भी सीक्रेट बताने से पहले एक बार ये जरूर सोच लें की सामने वाले इंसान भरोसा के लायक भी है या नहीं। हर किसी के साथ अपनी personal बातें कभी share ना करें, फिर चाहे आपको को किसी पर कितना भी भरोसा क्यों ना हो। और आप खुद को भी ऐसा बनाएं की आप दूसरों की बातों को भी सीक्रेट रख सकें ताकि आप भी एक अच्छे और ख़ास व्यक्ति कहलाएं। आप भी आपने आप को उस तीसरी मूर्ति की तरह बनाएं जो दूसरे की बातों को सुनते तो हैं लेकिन उन्हें कभी भी किसी और को बताते नहीं।

आई होप की इस akbar birabal moral story से आपने कुछ अच्छा सीखा हो। इस स्टोरी को लेकर आपका कोई भी विचार हो तो comment section में जरूर बताएं। ऐसी ही और भी प्रेरणादायक कहानियां या फिर moral stories पड़ने के लिए इस पेज से जुड़ें रहें। इस मोरल स्टोरी को शेयर करना ना भूलें।

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