आलस्य से खुद को कैसे बचाएं। आलसी व्यक्ति का जीवन और समस्याएं।

हर व्यक्ति ये बात जानता है की आलस्य सभी के जीवन का दुश्मन है। आलस या फिर आलस्य हमें कुछ भी कार्य नहीं करने देता। आपने देखा होगा कि आलसियों का काम होता है बस खाना, सोना या फिर घर से कहीं दूर निकल जाना ताकि उन्हें कोई काम ना करना पड़े। आलसी व्यक्ति घर के बड़े सदस्यों की बातों का अपमान करते हैं, उनकी बातें नही मानते।

कोई काम करने को अगर बोल दे तो बहाने बनाकर उसे टाल देते हैं। आलसी लोग बातों का अनसुना करते हैं। उन्हें घर परिवार, दुनिया से कोई मतलब नहीं होता है। वह क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं इससे भी कोई मतलब नहीं होता। उन्हें मतलब होता है तो बस अपने आराम से। (Written By Divya Mewari)

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आलसी व्यक्ति के जीवन का किस्सा –

एक बार एक लड़का था। जो की बहुत आलसी था। कुछ काम नहीं करता था। वह अपने सारे काम कल पर डाल देता। वो बस खाता, पीता, दोस्तों के साथ घूमता रहता। पढ़ाई की बात आती तो वो “कल से करूंगा” बोलकर उसे भी टाल देता। अपने बच्चे के आलसीपन के कारण उसके माता-पिता काफी परेशान रहते थे।

जैसे तैसे उसने अपनी पढ़ाई पूरी की, फिर नौकरी की तलाश करने लगा। नौकरी कहीं मिल नहीं रही थी क्योंकि उसकी पढ़ाई इतनी अच्छी नहीं थी कि उसे कोई नौकरी दे पाए। जहां कहीं उसकी नौकरी लगती भी तो “काम बहुत है” बोलकर वो नौकरी छोड़ देता। अपने आलस्य के कारण वो मेहनत करने से डरता था।

वो ऐसी नौकरी की तलाश करने लगा जहां सारा दिन बैठे बैठे निकल जाए और समय पर तनख्वाह मिल जाए। लेकिन ऐसी नौकरी उसे कहीं मिल नही रही थी। जिसके लिए वह दिन रात भगवान को कोसने में लगा रहता कि हमेशा मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है, इतना समय हो गया उसे कोई आराम की नौकरी नहीं मिली। जब नौकरी कहीं नहीं लगी तो वह अपने पिता के साथ दुकानदारी करने लगा।

उसके पिता ने दुकानदारी का सारा जिम्मा अपने लड़के पर डाल दिया। लेकिन वो तो आलसी था जब भी कोई ग्राहक आता तो वो उसे कल आने के लिए बोल देता और दिन भर दुकान में सोता रहता। धीरे धीरे लोगों ने उसकी दुकान में आना बंद कर दिया। सही तरीके से काम ना करने के कारण उसकी दुकानदारी खत्म हो गई।

दुकानदारी खत्म हुई तो उसके माता-पिता भी उसे कोसने लगे। इन सब बातों के लिए भी वह आलसी लड़का भगवान को ही दोष देने लगा कि आपने मुझे इतन आलसी बना दिया। आपने मेरी दुकानदारी छीन ली। आप ही मेरे साथ बुरा करते हो। वो अपने आलस का जिम्मेदार हमेशा भगवान को बनाता।

उसके आलसपन के कारण उसने अपनी दुकानदारी बर्बाद कर दी और अपने माता-पिता का नाम भी बर्बाद कर दिया। ऐसे ही आलसी लोग आपको अपने आस पास भी मिल जायेंगे। जो खुद कुछ काम करते नही ऊपर से घरवालों के कामों को भी ठप कर बैठते हैं।

आलस आने के कारण और आलसी जीवन के नुकसान

सुबह समय पर ना उठना भी आलस आने का कारण होता है। आलस के कारण ही हम सुबह जल्दी उठ नही पाते। सुबह देर से उठने से हमारा शरीर थका थका सा रहता है जिसकी वजह से हमें दिन भर आलस्य आता है। इसी तरह रात को देर तक उठे रहना भी आलस्य को बढ़ाता है। जिसकी वजह से हम देर में उठते हैं और सारा दिन थके थके से रहते हैं।

इसी तरह आज का काम कल में टालना भी आलस्य की निशानी है। अपना कीमती समय गेम, टीवी, मोबाइल में बिताना। दिन भर सोए रहना। किसी काम को करने का मन ना करना। ये सब आलसीपन की निशानियां। सुबह जल्दी ना उठने से हमारे बहुत से कार्य रह जाते हैं, जैसे मैं एक गृहणी हूं।

अगर मैं सुबह टाइम पर नहीं उठती हूं तो मेरे बहुत से काम नहीं हो पाते हैं और फिर बाद में उन कामों को करने का मन ही नहीं करता है। धीरे-धीरे काम इतना बढ़ जाता है की सारा दिन फिर उन्हीं में बर्बाद हो जाता है। अगर रोज का काम रोज होगा तो काम भी कम होगा, समय भी कम बर्बाद होगा। आजकल लोग सुविधाओं के पीछा ज्यादा भाग रहे हैं।

इंसान चाहता है की उसे कम से कम चीजें करनी पड़ें। जिसकी वजह से हम आलसी होते जा रहे हैं। आज कल लोगों को घर में खाना बनाने में भी आलस आने लगा है। खाना घर में बनाने के बदले वो बाहर से मंगा लेते हैं। आलस के कारण बच्चो का पढ़ने में मन नहीं लगता है। वो सारा दिन फोन में घुसे रहना चाहते हैं। पढ़ाई उन्हें बोझ लगने लगती है।

कुछ लोग इतने आलसी होते हैं की वो जरूरी कामों के लिए भी घर से बाहर निकलना पसंद नहीं करते। लोग घर से बाहर निकल कर काम नही करना चाहते। जो अच्छी नौकरी या पैसे कमाते हैं वह यह सोचते हैं कि सब चीज उनके मुंह के सामने ही आ जाए और उन्हें कहीं भी जाने की जरूरत ही ना पड़े।

वह ऑफिस का काम भी घर से करने की कोशिश करते हैं। घर के काम ना करने पड़े इसके लिए लोग घर में नौकर रख लेते हैं। आज हर इंसान का यही हाल है कि वह कुछ नहीं करना चाहता है लेकिन सोचता है कि उसके पास सब कुछ हो। आज के समय में सुविधाएं बहुत हैं जिनकी वजह से हर कोई आलस से भर गया है। ये सुविधाएं हम सभी के लिए काफी हानिकारक भी हैं।

आलस्य से होने वाले नुकसान

आलस्य से हमारे शरीर को नुकसान होता है। आज हर कोई थोड़ा दूर जाने के लिए स्कूटी या बाइक का सहारा लेता है। पैदल चलना कोई पसंद नही करता। जिससे हमारा शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। आपने बुजुर्गों के मुंह से सुना होगा कि सुबह जल्दी उठकर थोड़ा घूमना फिरना चाहिए, जो की आलस को दूर करने में मदद करता है।

आलस से तनाव की स्थिति भी उत्पन्न होती है। आलय व्यक्ति को अगर कोई ज्यादा काम करने को बोल दे तो वो जल्दी तनाव में आ जाते हैं। आलसी लोगों को कोई अपना मित्र बनाना स्वीकार नहीं करता है। आलसी व्यक्ति ज्यादातर अपना समय अकेले में व्यतीत करता है। आलसी व्यक्ति अपने साथ-साथ दूसरों का समय भी बर्बाद करता है। उनके जीवन के आसपास क्या चल रहा है उन्हें मालूम ही नहीं होता।

आलस्य की वजह से हम अपने जरूरी कामों भी टालते हैं जिसकी वजह से कई बार हमें नुकसान भी हो जाता है। आलस्य की वजह से हम सुबह देर से उठते हैं और समय पर अपने कामों को पूरा नहीं कर पाते। पढ़ाई में आलस्य दिखाने वाले लोग अक्सर दूसरों से पीछे रह जाते हैं। इसी तरह नौकरी या काम में आलस दिखाने वाले लोगों की तरक्की नहीं हो पाती। आलसी इंसान को लोग निकम्मा और नकारा समझते हैं।

आलस्य से कैसे बचें

आलस्य से बचने के लिए आप सुबह जल्दी उठकर वॉक पर जा सकते हैं। योगा कर सकते हैं। योग से मन को शांति मिलती है। तनाव डिप्रेशन भी दूर होता है। मेडिटेशन कर सकते हैं जिससे दिमाग शांत रहता है। आप अपने कार्यों को निर्धारित कर सकते हैं। उनकी सूची बना सकते हैं।

किसी भी काम को करने से पहले अपना मन बना लें की हमें वो कार्य करना ही है, उसे किसी भी हाल में अधूरा नहीं छोड़ना है। अपने मन को स्थिर रखिए। स्वस्थ आहार लें। जरूरत से ज्यादा ना खाएं। ज्यादा खाने से भी आलस आता है और काम में मन नहीं लगता। आलस्य को दूर करने के लिए gym join कर सकते हैं।

Exercise करने से हमारी बॉडी फ्रेश फील करती है। इसके अलावा खाली समय में आप अच्छी किताबें पड़े। मोबाइल से दूर रहें। लेटे लेते मोबाइल चलाने से भी हमारे अंदर आलसीपन आता है। आस पास के लोगों से मिलें, बातें करें। काम करते समय अपनी पसंद के गाने सुने। ऐसा करने से काम में मन लगा रहता है। अपने आप को फिट रखने की कोशिश करें और आलस्य का त्याग करने की कोशिश करें।

बच्चों को आलस से कैसे दूर रखें

बच्चों को आलस्य से दूर रखने के लिए आप उन्हें फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा कराएं। उनका मन बहलाने के लिए मोबाइल ना दें। उन्हें साइक्लिंग सीखें। उनके साथ कोई स्पोर्ट्स खेलें इससे आपकी बॉडी भी फिट रहेगी। उनकी उमर के बच्चों के साथ खेलने को कहें। बच्चा अगर हर समय घर के अंदर ही रहेगा तो वो अलसी जीवन का शिकार हो जाएगा। उसकी आदत या तो टीवी देखने की हो जायेगी या फिर मोबाइल चलाने की।

खुद को आलस्य से कैसे दूर रखें।

सबसे पहले ये जानने की कोशिश करें की आपको आलस आता क्यों है। ऐसा नहीं है की हर व्यक्ति हर समय आलस से ही भरा हो। सही वजह को जरूर जानें। इसके अलावा अपने कामों को कभी कल पर ना टालें। जो काम आपको आज करना उसे आज ही कर लें। ज्यादा सोने की आदत ना बनाएं और ना ही दिन सोने की आदत बनाएं। 8 घंटे की पूरी नींद लें।

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